वज्र में अनुसंधान कर सकेंगे एनआरआई वैज्ञानिक

नई दिल्ली। देश के अनेको प्रतिभाशाली वैज्ञानिक अमेरिका एवं ब्रिटेन समेत अन्य देशों में सेवाएं दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसी प्रतिभाओं को देश में ही अनुसंधान कार्य करने के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने विदेश में कार्यरत एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) वैज्ञानिकों के लिए शोध संस्थानों का द्वार खोलने वाली योजना वज्र गुरुवार को लागू कर दिया। योजना के तहत ये वैज्ञानिक उपरोक्त संस्थानों में एक से लेकर तीन महीने तक अपनी सेवाएं दे सकते हैं। इसके एवज में सरकार इन्हें तनख्वाह के रूप में पहले महीने 15 हजार अमेरिकी डॉलर (9,68,996 रुपये) प्रदान करेगी। बाकी दो महीनों में वैज्ञानिकों को दस-दस हजार अमेरिकी डॉलर (6,46,096 रुपये) मिलेंगे। केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीक मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने विजिटिंग एडवांस्ड ज्वाइंट रिसर्च (वज्र) योजना लागू किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैसे तो यह योजना विदेशी वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों के लिए है, लेकिन सारा जोर एनआरआई और भारतीय मूल के वैज्ञानिकों पर है। इन्हें सरकारी शोध एवं शिक्षण संस्थानों में काम करने की पेशकश की गई है।’ हर्षवर्धन ने कहा कि मोदी सरकार को लेकर विदेश में बसे भारतीय वैज्ञानिकों में नई उम्मीद जगी है। एनआरआई व भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को आशा है कि देश में उन्हें उच्चस्तरीय सुविधा और काम करने का उपयुक्त माहौल मिलेगा।’ सरकार ने फिलहाल वज्र योजना के तहत एक हजार एनआरआई वैज्ञानिकों को ही शामिल किया है।

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