चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग का फरमान मुझे माने अपना भगवान

 

बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी देश में काफी ताकतवर हैं। हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद शी जिनफिंग और भी ज्यादा ताकतवर हो गए हैं। इस सम्मेलन के बाद जिनपिंग का कद पार्टी के संस्थापक माओ और उनके उत्तराधिकारी डेंग शियाओपिंग के बराबर हो गया है। इसके बाद चीन में उन्‍हें भगवान का दर्ज देते हुए जीसस क्राइस्‍ट से भी बड़ा नेता बताया जाने लगा है। सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार चीन के दक्षिण-पूर्व ईसाई धर्म के लोगों को कहा गया है कि अगर वे गरीबी से निजात के लिए सरकारी लाभ पाना चाहते हैं तो अपने घरों से जीसस क्राइस्‍ट की तस्‍वीरें हटा लें और उनकी जगह राष्‍ट्रपति जिनपिंग की तस्‍वीरें लगाएं। युगान काउंटी में हजारों ईसाइयों से स्‍थानीय अधिकारियों ने कहा है कि जीसस क्राइस्‍ट नहीं उनकी गरीबी या बीमारियां दूर नहीं करने वाले, बल्कि चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी और शी जिनपिंग ही कर सकते है। इसलिए उन्‍हें जीसस क्राइस्‍ट की तस्‍वीरें निकाल देनी चाहिए और राष्‍ट्रपति जिनपिंग की अच्‍छी सी तस्‍वीर लगा लेनी चाहिए। अखबार के अनुसार,चीन की सबसे बड़ी झील पोयांग के किनारे स्थित यह काउंटी अपनी गरीबी के साथ बड़ी संख्‍या में बसे ईसाई समुदाय के लिए जानी जाती है। इसकी 10 लाख आबादी की 11 फीसदी गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने को मजबूर है। जबकि इनमें करीब 10 फीसदी ईसाई हैं। अमेरिकी अखबार के अनुसार,युगान काउंटी में एक सोशल मीडिया अकाउंट के हवाले से पता चला है कि ग्रामीणों ने ‘स्‍वेच्‍छापूर्वक’ ईसाई धर्म से जुड़े 624 तस्‍वीरें हटा ली हैं और उनकी जगह राष्‍ट्रपति जिनपिंग की तस्‍वीरें लगा दी हैं। हालांकि अभी भी बेहद छोटे स्‍तर पर यह बदलाव हुआ है।

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