सऊदी अरब की मदद को तैयार हुआ इजराइल, ईरान के खिलाफ लामबंद हुआ अमेरिका

 

नई दिल्ली । यमन की मिसाइल को लेकर इन दिनों दो शक्तिशाली शिया-सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब और ईरान आमने-सामने हैं। इस बीच इजरायल ने सऊदी अरब को ईरान के खिलाफ मदद करने की बात कही है। गौर करने वाली बात यहां हैं कि इजरायल और सऊदी अरब के बीच भी अच्छे संबंध नहीं रहे। इजरायल के रक्षा प्रमुख ने सऊदी के अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका देश ईरान के खिलाफ सऊदी अरब को खुफिया जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए तैयार है। इजरायल के रक्षाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल गदी ईसेनकोट ने अपने बताया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक नया गठबंधन बनाकर प्रमुख रणनीतिक योजना बनाने की आवश्यकता है ताकि ईरान से मिल रही धमकियों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हम सऊदी अरब के देशों के साथ अनुभवों के आदान प्रदान करने और खुफिया जानकारी की अदला बदली करने के लिए तैयार हैं।

हाल के समय में इजरायल द्वारा सऊदी अरब को किसी प्रकार की खुफिया जानकारी देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम उन्हें जरूरी जानकारियां प्रदान करने के लिए तैयार हैं,कई मामलों में दोनों के पक्ष एक समान हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार उन्होंने ये भी कहा कि ईरान क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि ईरान के इरादों को लेकर तेल अवीव और रियाद के बीच पूर्ण सहमति है, इजरायल और सऊदी अरब कभी भी एक दूसरे के खिलाफ नहीं रहे। ईसेनकोट ने यह भी कहा कि इजरायल की सुरक्षा स्थिति आज की तुलना में कभी भी बेहतर नहीं रही है,यह इसलिए क्योंकि इस क्षेत्र में उदारवादी देशों द्वारा हमें काफी सम्मान मिला है। उन्होंने तेहरान पर आरोप लगाया कि वह इस क्षेत्र को हथियारों के कारखानों के निर्माण के द्वारा अस्थिर करने और मध्य पूर्व में आतंकवादी समूहों को हथियारों की स्पलाई करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान के इरादे के बारे में पूछने पर ईसेनकोट ने कहा, ‘ईरान मध्य पूर्व पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है,वो लेबनान से ईरान तक और फिर लाल सागर तक एक शिया बहुल इलाका बनाना चाहता है। आईडीएफ प्रमुख ने इस बात पर भी बल दिया कि इजरायल का लेबनान के हेज़बल्ला पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है। यह पहली बार है जब किसी इजरायली रक्षा प्रमुख का इंटरव्यू सऊदी अरब के एक मीडिया अखबार द्वारा किया गया है। बता दें कि दोनों देशों का एक दूसरे के साथ राजनयिक संबंध नहीं है। ईसेनकोट की ये टिप्पणी अगस्त 2015 में आईडीएफ (इजरायल डिफेंस चीफ) द्वारा दिए गए बयान के बावजूद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान इजरायल के लिए बड़ा खतरा नहीं है। इसके बजाय,उन्होंने कहा था कि हिजबुल्लाह और हमास इजरायल की सुरक्षा के लिए सबसे खतरे थे। बता दें कि तेल अवीव और तेहरान 1979 में ईरान द्वारा की गई इस्लामिक क्रांति के बाद से बड़े दुश्मन हैं,उस समय, नई ईरानी सरकार ने यहूदी राज्य की वैधता को स्वीकार करने और राजनयिक संबंधों को खत्म करने से इनकार कर दिया था।

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