भारत में आंतक फैलाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का हो रहा इस्तेमाल, हिंदी,तमिल और बांग्ला में इंटरनेट पर उपलब्ध कटेंट

 

नई दिल्ली । दुनिया में दशहत फैलाने के लिए आंतकी संगठन अल-कायदा इंटरनेट का बखूबी इस्तेमाल कर रहा है। इस इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के कई देशों में दहशत फैलाने के बाद अब आंतकी इसका इस्तेमाल भारत में भी बड़े पैमाने पर करने को तैयार है। इसके लिए अल-कायदा भारतीय उपमहाद्वीप में क्षेत्रीय भाषा में जिहादी कंटेंट मुहैया करा रहा है। इंटरनेट पर अल-कायदा के ये कंटेंट तमिल,बांग्ला और हिंदी ट्रांसलेशन के साथ मौजूद हैं। अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट पर मौजूद अल-कायदा का ये कंटेंट दरअसल जिहादी विचार से प्रेरित मैग्जीन ‘अल-रिसाल्लाह’ और ‘इंस्पायर’ के कुछ अंश हैं। ऐसे जिहादी कंटेंट के जरिए अल-कायदा जिहाद और कट्टरवाद को और आगे बढ़ाना चाहता है। इसके लिए भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों से ज्यादा से ज्यादा आतंकियों की भर्ती कर रहा है। भारत के दक्षिण के राज्य केरल में इस तरह की गतिविधियों के कई सारे मामले सामने आ चुके है। इस कारण भारतीय सुरक्षा एजेंसियों भी बहुत अधिक सक्रिय हो चुकी है।

बता दें कि साल 2005 में इंडियन मुजाहिद्दीन ने ऐसा ही तरीका अपनाया था, भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए इंडियन मुजाहिद्दीन ने क्षेत्रीय भाषा में जिहादी कंटेंट ऑनलाइन किए थे। अल-कायदा अपने जिहादी कंटेंट से पढ़े-लिखे वॉलंटियर्स को टारगेट कर रहा है। डॉक्टर्स और इंजीनियर्स भी उसके निशाने पर हैं। तमिल के एक आर्टिकल में लिखा है,मैं आपसे पूछता हूं डॉक्टर! आपकी बेहतर सेवा क्या होगी? ऐसे किसी बच्चे के लिए बदला लेना, जिसने अल्लेप्पो में हुए धमाके में अपना पैर खो दिया है या फिर सिर्फ उसका इलाज करना। आर्टिकल में आगे लिखा है कि क्या हमें अपने अल्लाह पर भरोसा नहीं है?अगर है तो हमें दूसरे लोगों को भी इसका भरोसा दिलाना होगा।

वहीं,बांग्ला जिहादी कंटेंट में अल-कायदा चीफ अमन- अल-जवाहिरी, डिप्टी चीफ समी-उल-हक के भाषणों के वीडियों सब टाइटल के साथ शामिल किए गए हैं। इन वीडियों में दोनों आतंकी बता सीरिया और सोमालिया में जिहाद की लड़ाई के बारे में बता रहे हैं। बता दें कि 2011 में अल-कायदा ने नए संगठन का ऐलान किया था। अल-कायदा के इस नए संगठन का नाम अल-कादीशिय्याह मीडिया’ है, जो अफगान एफिलिएट’ नाम के संगठन की ओर से चलाया जा रहा है। अल-कादीशिय्याह मीडिया’ में उर्दू, हिंदी, बांग्ला और फारसी में जिहादी कंटेंट जारी  किए जाते हैं।

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